''Unknown Call" ( एक रहस्यमयी कहानी )
सर्दी की ठंडी रात थी। घड़ी 12:30 बजा रही थी। घना कोहरा चारों तरफ फैला था , और शहर की गलियाँ वीरान पड़ी थीं। लेकिन रोहन की आँखों में नींद नहीं थी। वह अपने लैपटॉप पर काम कर रहा था , तभि अचानक उसका फोन बज उठा । रोहन ने फोन की स्क्रीन देखी – " Unknown call"। इतनी रात को कौन हो सकता है ? थोड़ी झिझक के बाद उसने कॉल रिसीव की । " हेलो ?" कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा , फिर एक कांपती हुई आवाज़ आई – " रो... रोहन! बचाओ... वे आ रहे हैं!" रोहन का कलेजा धक से रह गया। " कौन ? कौन आ रहे हैं ?" उसने घबराकर पूछा। लेकिन उधर से सिर्फ़ हल्की सांसों की आवाज़ आई , और फिर कॉल कट गई। रोहन ने नंबर दोबारा डायल करने की कोशिश की , लेकिन फोन पर " नंबर अमान्य है" लिखा आ रहा था। कुछ देर बाद , उसके दरवाज़े पर धीमी दस्तक हुई। " टॉक... टॉक..." रोहन के हाथ-पाँव ठंडे पड़ गए। उसने धीरे से दरवाज़े की झिरी से देखा , लेकिन बाहर कोई नहीं था। लेकिन दरवाज़े के सामने एक पुरानी , फटी हुई डायरी रखी थी। डरते हुए उसने डायरी उठाई। पहले पन्ने पर लाल स्याही...